Tag

योग दिवस निबंध

Browsing

विश्व योग दिवस की शुरुआत नमस्कार आज हम इस ब्लॉग में जानेंगे कि विश्व योग दिवस की शुरुआत कैसे और कब हुई और यह प्रतिवर्ष 21 जून को ही क्यों मनाया जाता है तो चलिए शुरू करते है अपना ब्लॉग भारतीय संस्कृति में योग का एक लंबा इतिहास रहा है और यह भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है । सदियों से भारतीय योग करते आए है । और 21 जून 2015 से विश्व योग के बारे में जानने लगा जब विश्व योग दिवस की शुरुआत हुई । योग दिवस की शुरुआत तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव से हुई । लेकिन 21 जून ही क्यों ? इसका भी एक रोचक कारण है जब योग दिवस मनाने का प्रस्ताव दिया गया तो देखा गया कि 21 जून यू एन कलेंडर में खाली दिन है और 21 जून साल का सबसे लंबा दिन होता है तथा योग भी हमारी आयु लंबी करता है इस तरह संयुक्त राष्ट्र ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया और प्रतिवर्ष 21जून को योग दिवस मनाया जाने लगा । योग दिवस ना प्रस्ताव एक पुर्तगाली नागरिक सदगुरु अमृत सूर्यानंद द्वारा तैयार किया गया ।26 जनवरी 2015 को भारत सरकार ने अमृत सूर्यानंद को पद्मश्री से सम्मानित किया वे यह सम्मान पाने वाले पहले पुर्तगाली नागरिक बने । अगर अमृत सूर्यानंद नहीं होते तो योग दिवस की परिकल्पना भी तय नहीं होती ।

https://bulletprofitsmartlink.com/smart-link/87022/4

योग भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग है । हमारी भारतीय संस्कृति सनातन संस्कृति है जिसका अर्थ है कि हमारी संस्कृति सदियों से चली आ रही है और इसमें प्राचीन मूल्यों और सिद्धांतों का प्रवाह वर्तमान समय तक बना हुआ है । ऐसा नहीं है की हमारी संस्कृति सदियों से एक जैसी ही रही है इसमें भी वक्त के साथ बदलाव आए है । लेकिन ये सनातन इसलिए है क्योंकि इस संस्कृति का मूल आज तक वैसा का वैसा ही है योग भारतीय संस्कृति का एक ऐसा तत्व है जो हजारों साल से इस संस्कृति के प्रवाह के साथ बना हुआ है । योग का जनक भगवान शिव को माना जाता है जिन्हे आदि योगी भी कहा जाता है भगवान शिव के बाद वैदिक ऋषियों ने योग पर चिंतन मनन किया इन ऋषियों ने पतंजलि प्रमुख है जिन्होंने महाभाष्य की रचना की और योग को और परिष्कृत कर जनमानस के समक्ष प्रस्तुत किया ।
धीरे धीरे भारत विदेशी आक्रांताओं कि धन लालसा व सम्राज्य विस्तार की नीति का शिकार हुआ जिससे भारतीय संस्कृति के प्रसार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा लेकिन भारतीय संस्कृति का प्रसार रुका नहीं यह उल्लेखनीय है कि वर्तमान में हुए नवीन उत्खननों से यह ज्ञात हुआ है कि भारतीय सनातन संस्कृति का प्रसार जापान , वियतनाम आदि देशों तक था इससे भारतीय संस्कृति की व्यापकता व महानता का पता चलता है।

इन विदेशी आक्रांताओं ने हमारी संस्कृति को नष्ट करने के उद्देश्य से उन तमाम शिक्षण केंद्रों को जला दिया जो योग व भारतीय संस्कृति के प्रसार का केंद्र थे भले वो नालंदा हो या तक्षशिला विश्वविद्यालय हर शिक्षण केंद्र को इन आक्रांताओं ने अपना शिकार बनाया । इन शिक्षण केंद्रों के साथ विभिन्न भारतीय विधाओं से सम्बन्धित साहित्य भी जल गया ।लेकिन यह हमारा सौभाग्य है कि इन सभी घटनाओं के बाद भी योग जैसी अद्वितीय विधा का प्रसार नहीं रुका और वो वर्तमान समय में हमारे पास उपलब्ध है व इसका प्रसार भारत ही नहीं वरन् संपूर्ण विश्व में हो रहा है ।
यह दुर्भाग्य पूर्ण है कि आजादी के बाद काफी सालों तक हमारे नीति निर्माताओं ने योग व भारतीय संस्कृति के अन्य मूल्यों पर कोई खास ध्यान नहीं दिया पर एक कथन है की अंधेरा तब तक है जब तक सूरज नहीं निकलता भारतीय संस्कृति के लिए भी सूर्य का उदय 2014 में हुआ जब एनडीए की सरकार आईं तभी से योग के प्रचार प्रसार पर व्यापक कार्य हुआ व इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र ने 2015 को विश्व योग दिवस मनाने की शुरुआत की । संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति के बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित करता है । वर्तमान समय में जब संपूर्ण मानव जीवन एक भौतिक वादी संस्कृति की और अग्रसर है या वक्त में योग एक अवसर है खुद को जानने व इस भौतिक वादी संस्कृति से मुक्ति का माध्यम बन रहा है व संयमित और आत्मनियंत्रित जीवन शैली का प्रवेश द्वार बना है । यह योग की बढ़ती उपयोगिता का ही परिणाम है कि आज जगह जगह योग क्लासेज संचालित हो रही है व योग लोगों की देनिक दिनचर्या का हिस्सा बन रहा है जो की योग के विस्तार की दिशा में एक अच्छा संकेत है ।