Category

Question answer

Category

लोथल की समुद्री देवी – सिकोतरी माता

बाजरे का साक्ष्य – लोथल ।
नाव के पांच मॉडल – लोथल ।
दिशा मापक यंत्र – लोथल
आटा पीसने की वृताकार चक्की – लोथल
ताम्र निर्मित पशु पक्षी – लोथल

सेंधव सभ्यता का ओद्यौगिक नगर – चन्हूदडो

सौंदर्य प्रसाधन व वक्राकार इंटे – चन्हूदडो

बिल्ली का पीछा करते हुए कुत्ता , स्याही का दवात , इक्का गाड़ी , – चन्हूदडो

बनवाली में दुर्ग टीले व नगर टीले के चारों और एक ही प्राचीर है ।

बनवाली से विकसित जल निकास प्रणाली का आभाव है ।

बनवाली को समृद्ध लोगों का नगर कहा जाता है ।

बनवाली के सभी घरों अग्नि कुंड मिले है और एक अर्द्ध चन्द्राकार सरंचना मिली है जिसके मंदिर होने का अनुमान है ।

हल का टेराकोटा मॉडल – बनवाली

चार कलश शवाधान – सुरकोतडा
घोड़े की अस्थियां – सुरकोतडा
तराजू का पलड़ा – सुरकोतडा

रोपड़ के उत्खनन से हड़प्पा से लेकर गुप्त व मध्यकाल तक के 6 सांस्कृतिक चरणों के अवशेष मिले है ।

मानव के साथ कुत्ते का शवा धान – रोपड़

भीराना – फतेहाबाद ,हरियाणा में स्थित इस स्थल को भारतीय पुरातत्व की रिपोर्ट में हड़प्पा सभ्यता का सबसे प्राचीन स्थल घोषित किया गया है ।

सिंधु व मेसोपोटामिया के व्यापार को सुगम बनाने के लिए सुत्का गेंडोर को बसाया गया इसे हड़प्पा के व्यापार का चौराहा कहा गया ।

शोतुगोई से नहरें निकालने के अवशेष मिले है ।

रोटी बेलने की चौकी , गिलहरी अंकित मृदभांड , मोर – आलमगीरपुर

गेहूं की खेती के साक्ष्य – हुलास

हड़प्पा सभ्यता का टकसाल – मांडी

तांबे की मुहर – देसलपुर

हड़प्पा सभ्यता के ओरस पुत्र – रंगपुर व प्रभास पट्टन ।

हाथी के अवशेष – रोजड़ी

पत्थर की नींव युक्त भवन – कुंतासी

पीतल का रथ – देमा बाद
चीते का महिष पर आक्रमण का दृश्य – देमाबाद

मांग भरी स्त्री मूर्तिया – नोसारो बलूचिस्तान

उत्तरी हड़प्पा काल में ग्रामीण संस्कृति का उदय हुआ और नगरीकरण के तत्व लुप्त होने लगे ।

उत्तर हड़प्पा से जुड़ी वस्पतियों की विविध प्रजातियों की प्राप्ति – संघोल से हुई है ।

मोहनजोदड़ो से प्राप्त योगी के सदृश मूर्ति को मैके ने पुजारी की मूर्ति , आर पी चन्द्रा ने योगी की मूर्ति व ए एल बाशम इसे मंगोल मूर्ति कहते है ।

मोहनजोदड़ो से एक बड़े साथ सींगो वाली बकरी , बैठी हुई भेड़ व धोलावीरा से एक गिरगिट कि प्रतिमा मिली है ।

मोहनजोदड़ो से प्राप्त नर्तकी की मूर्ति को मार्शल ने आदिवासी स्त्री , पीगट ने बलूची नारी व ठाकुर प्रसाद वर्मा ने इसे पार्वती की मूर्ति बताया है ।

हड़प्पा से तांबे की इक्का गाड़ी मिली है ।

मेहरगढ़ से हड़प्पा सभ्यता की सबसे प्राचीन मृण मूर्ति मिली है ।

गेंडे की मिट्टी से निर्मित मूर्ति – लोथल ।

मोहनजोदड़ो , काली बंगा , लोथल , रंगपुर , बनावली से घोड़े की मिट्टी की मूर्तियां मिली है ।

सिंधु सभ्यता की सर्वाधिक मुहरे सेलखड़ी की बनी है ।
मोहनजोदड़ो से चांदी की बनी यूनिकॉर्न प्रतीक की मुहरें मिली है ।

लोथल से बटन के आकार की फारस की गोल मुहर मिली है ।

गाय , घोड़ा ,सिंह ,ऊंट का अंकन मुहरों पर नहीं मिलता है । इन की मूर्तियां मिली है ।

चहुं दडो की एक मुहर पर घड़ियालों का अंकन मिलता है ।

  • लोथल की एक मुद्रा पर बीज बोन के यंत्र का अंकन है ।

मोहनजोदड़ो से एक विशेष कोटी का चमकीला धूसर मृदभांड प्राप्त हुआ है जिस पर कांच के समान की ऑपकारी की गई थी । यह विश्व में ऑपकारी का पहला उदाहरण है ।

मोहनजोदड़ो ,हड़प्पा , चहुंदडो से मृदभांड बनाने के चूल्हे मिले है ।

हड़प्पा से दूध पिलाती हिरणी के अंकन वाला मृद भांड मिला है ।

हड़प्पा , मोहनजोदड़ो , अल्लादिनों , से आभूषण के ढेर प्राप्त हुए है ।
हरियाणा के फरमाना नामक स्थल पर एक कब्रिस्तान मिला है जहां शवों को गहनों के साथ दफनाया गया है ।

हड़प्पा से सोने के मनको वाला हार प्राप्त हुआ है ।
मोहनजोदड़ो से तांबे तथा हाथीदांत की बनी आलपिन मिली है ।

हड़प्पा सभ्यता का प्रमुख उद्योग वस्त्र उद्योग था ।