Category

करेंट आर्टिकल्स

Category

गरीबी के दुष्चक्र में जकड़े गांव –
कोरोना की पहली लहर उसके कारण हुआ लोक डाउन फिर दूसरी लहर उसके कारण हुआ लोक डाउन और अब तीसरी लहर की आशंका इन सब लहरों ने स्वास्थ्य सेवाओं को तो निश्चित रूप से प्रभावित किया लेकिन इससे भी ज्यादा इसका प्रत्यक्ष प्रभाव हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा ऐसा नहीं है कि इससे शहर अप्रभावित रहे है लेकिन शहरों के पास गांवों कि तुलना में ज्यादा साधन ,संसाधन है ।वहीं गांव जिनमें जीविका के साधन सीमित है इस कोरोना की लहरों के कारण गरीबी के दुष्चक्र में फंस गए है । गरीबी अकेले नहीं आती वो कई अन्य समस्याओं को जन्म देती है जैसे अशिक्षा , कुपोषण , जनसंख्या वृद्धि इत्यादि ।
आज हमारी अर्थव्यवस्था के केंद्र में मुद्रा है और इसी मुद्रा के चारों ओर हमारा पूरा अर्थतंत्र चक्कर लगाता है इस मौद्रिक तंत्र के संदर्भ में हम गांव और शहरों को देखें तो गांव के अधिकांश नवयुवक काम की तलाश में शहरों की ओर पलायन करते हैं और वहां से अर्जित मुद्रा का प्रवाह गांव की ओर होता है जिससे गांव के अर्थतंत्र के पहिए को गति मिलती है और इस मौद्रिक प्रवाह में जो अधिशेष होता है वो ग्रामीण बचत का रूप लेता है । कोरोना के कारण हुए लोक डाउन से यह मौद्रिक प्रवाह सर्वाधिक बाधित हुआ क्युकी ग्रामीण युवा जो पहले शहरों में काम कर रहे थे उन्हें लॉकडाउन के कारण वापस गांव लौटना पड़ा इस कारण कोरोना के इस पूरे समय के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बाहरी मुद्रा का प्रवाह बंद हो गया और शहर से ग्रामीण श्रम शक्ति के लौट आने के कारण ग्रामीण संसाधनों पर भार बढ़ गया । ग्रामीण अर्थव्यवस्था इस स्थिति में नहीं है कि अपनी समस्त श्रम शक्ति को नियोजित कर पाएं मसलन गांव में छिपी बेरोजगारी की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।
कोरोना की पहली लहर के कारण हुआ लोक डाउन तो जैसे तैसे निकल गया लोगो को आशा थी कि जल्द सब कुछ सामान्य हो जाएगा लेकिन सब कुछ खुलने लगा ही था कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण दूसरा लोक डाउन करना पड़ा इससे फिर वही पहले वाली स्थिति उत्पन्न हो गई और ग्रामीणों को अपने दैनिक खर्चे के लिए अपनी पुरानी बचत को खर्च करना पड़ा । अब जब सब कुछ खुल चुका है तो लोग खर्च करने से बच रहे हैं क्योंकि वह अपनी पुरानी बचत खर्च कर चुके हैं और इस वक्त उनका ध्यान बचत की ओर है । इससे आर्थिक गतिशीलता रुक गई है और उत्पादों की खपत कम हो गई है जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा । उत्पादन घटने से श्रम शक्ति की कम आवश्यकता होगी और कारखानों से मजदूरों की छंटनी होगी और बेरोजगारी में इजाफा होगा और कहीं और नियोजित न हो पाने के कारण यह श्रम शक्ति वापस गांव की ओर आएगी और ग्रामीण संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा । इस तरह बचत करने , आमदनी के घटने से जो मध्यमवर्गीय परिवार कुछ ठीक है अवस्था में थे वह वापस इस गरीबी के दुष्चक्र में फंस चुके है