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आधुनिक भारत के व्यक्तित्व

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महाराजा रणजीत सिंह –
महाराजा रणजीत सिंह ने पंजाब में सिख राज्य की स्थापना की । रणजीत सिंह से पूर्व पंजाब क्षेत्र के सिख कई समूहों में बिखरे थे जिन्हें मिसल कहा जाता था । ऐसी ही एक मिसल के प्रमुख से रणजीत सिंह सिख राज्य के शासक बने और सभी मिसलों से एक सुदृढ़ राज्य का निर्माण किया –

नाम – रणजीत सिंह
जन्म 13 नवंबर 1780 ई
स्थान गुंजारावला
मृत्यु 27 जून 1839 ई
पिता महासिंह

13 नवंबर, 1780 को रणजीत सिंह का जन्म हुआ। ये सुकरचकिया मिसल के प्रमुख महासिंह के पुत्र थे। 1792 ई. में महासिंह की मृत्यु हो गई और 12 वर्ष की आयु में ये सुकरचकिया मिसल के प्रमुख बने महाराजा रणजीत सिंह ने मिसलों का एकीकरण किया और एक शक्तिशाली राज्य की स्थापना की।

  • रणजीत सिंह एक साहसी सैनिक, कुशल प्रशासक और चतुर कूटनीतिज्ञ थे जिन्होंने 1799 ई. में लाहौर और 1802 ई. में अमृतसर पर अधिकार कर लिया था।
  • 1808 ई. में रणजीत सिंह ने सतलुज नदी को पार किया और
  • फरीदकोट, मालेरकोटला व अम्बाला को जीत लिया, किंतु 1809 ई. की अमृतसर संधि द्वारा सतलुज नदी के पार के प्रदेशों पर रणजीत सिंह ने अंग्रेजों के अधिकार को स्वीकार कर लिया।
  • 1809 ई. में लॉर्ड मिंटो के दूत चार्ल्स मेटकॉफ और रणजीत सिंह के मध्य अमृतसर की संधि हुई।

ईश्वर चंद्र विद्यासागर –
ईश्वर चंद्र विद्यासागर भारतीय सामाजिक जागरण के एक महत्वपूर्ण स्तंभ थे ।
ईश्वर चन्द्र विद्यासागर ने महिला शिक्षा व विधवा पुनर्विवाह के लिए प्रयास किए और इन्हीं के प्रयासों की बदौलत विधवा पुनर्विवाह अधिनियम बन पाया ।

नाम ईश्वर चन्द्र बंदोपाध्याय
जन्म 26 सितंबर 1820 ई
स्थानबंगाल
पिता ठाकुरदास
माता भगवती देवी

ईश्वर चंद्र विद्यासागर गरीबों व दलितों के संरक्षक माने जाते थे । इन्होंने स्त्री शिक्षा हेतू काफी प्रयास किए और कई महिला महाविद्यालयों की स्थापना की ।

29 जुलाई 1891 ई को ईश्वर चन्द्र विद्यासागर मृत्यु हो गई ।

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हैदर अली –
मुगल साम्राज्य के पतन के बाद कई नवीन राज्यो का उदय हुआ इन राज्यो में दक्षिण भारत में हैदराबाद के बाद मैसूर राज्य प्रमुख था ।
मैसूर राज्य का उदय हैदर अली के अधीन हुआ जिसका विवरण निम्न प्रकार है –

नाम हैदर अली
जन्म 1721 ई
मृत्यु 1782 ई
पद सैनिक व मैसूर का शासक

मैसूर राज्य पर एक हिन्दू वाडियार राजवंश का शासन था लेकिन 18 वी सदी के शुरुआत में मैसूर राज्य के दीवान नंजाराम , व सेनापति देवराज ने मैसूर राज्य की शक्ति अपने हाथों में ले ली तथा वहां के शासक चिक्का कृष्णराज को अपने अधीन कर लिया इसी पृष्ठभूमि में मैसूर के इतिहास में हैदर अली का उदय होता है ।
हैदर अली ने अपने जीवन का प्रारंभ मैसूर की सेना में एक सैनिक अधिकारी के रूप में किया और अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर आगे चलकर मैसूर का शासक बन कर मैसूर का नेतृत्व किया ।

हैदर अली शासक के रूप में –

  • हैदर अली शिक्षित नहीं था लेकिन व्यवहारिक रूप से कुशल व तेज था।

*सैनिक रहते हुए हैदर अली ने वर्ष 1755 ई में फ्रांसीसियों की मदद से डंडी गुल में एक आधुनिक शस्त्रागार स्थापित किया ।

  • वर्ष 1761 ई में नंजारामा को सत्ता से हटाकर मैसूर राज्य पर अधिकार कर लिया ।
  • हैदर अली ने मराठा ,निजाम , व अंग्रेजो की सेना को कई बार पराजित किया और मद्रास तक पहुंच गया ।
  • प्रथम व द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्ध हैदर अली के शासनकाल में हुए ।
  • 1769 ई में हैदर अली की शर्तों पर अंग्रेजो ने मद्रास की संधि की
  • 1782 ई में हैदर अली की मृत्यु हो गई और इसके बाद इसका पुत्र टीपू सुल्तान मैसूर का अगला शासक बना ।

बालाजी बाजीराव –
बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद बालाजी बाजीराव अगला मराठा पेशवा बना । बालाजी बाजीराव ने अपने पिता की भांति मराठा साम्राज्य को उत्कर्ष पर पहुंचाया ,बालाजी बाजीराव के समय की महत्वपूर्ण घटना पानीपत का तीसरा युद्ध था जिसमें मराठों की पराजय हुई बालाजी बाजीराव का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है –

जन्म 8 दिसंबर 1721 ई
मृत्यु23 जून 1761 ई
पिताबाजीराव प्रथम
विशिष्ठ तीसरे पेशवा
  • बालाजी बाजीराव 18 साल की उम्र में अपने पिता बाजीराव प्रथम की मृत्यु के बाद अगला मराठा पेशवा बना
  • बालाजी बाजीराव को नाना साहब के नाम से भी जाना जाता है जो 1740 से 1761 ई तक मराठा पेशवा रहा ।
  • बालाजी बाजीराव के समय ही पानीपत का तीसरा युद्ध1761 ई हुआ जिसमें मराठों की पराजय हुई और कई महत्वपूर्ण मराठा सरदार मारे गए ।
  • पानीपत के तीसरे युद्ध में पेशवा का बेटा विश्वास राव ,सदाशिव राव भाऊ और लगभग 28000 मराठा सैनिकों कि मृत्यु हुई ।
  • पानीपत की हार अंग्रेज़ी कम्पनी के लिए एक अवसर के समान थी उसे दक्षिण भारत में अपनी सत्ता मजबूत करने का अवसर मिल गया ।

*पानीपत के तीसरे युद्ध में हार के बाद पेशवा बालाजी बाजीराव की 1761 ई में मृत्यु हो गई ।