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आधुनिक भारत की संधियां

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इलाहाबाद की दूसरी संधि-
प्लासी के युद्ध में हार के बाद अंग्रेजो ने अवध के नवाब शुजाउदौला के सााथ इलाहाबाद की दूसरी संधि हुई जो इस प्रकार है –

सन्16 अगस्त 1765 ई
संधि कर्ताक्लाइव व अवध के नवाब

इलाहाबाद की दूसरी संधि की शर्तें-

  • अवध का राज्य कड़ा और इलाहाबाद को छोड़कर नवाब को वापस दे दिया गया ।
  • कंपनी को पच्चास हजार रु व चुनार का दुर्ग प्राप्त हुए ।
  • कंपनी को अवध में कर मुक्त व्यापार करने की सुविधा प्राप्त हुई ।

इलाहाबाद की प्रथम संधि –
इलाहाबाद की प्रथम संधि बक्सर के युद्ध में मुगल बादशाह , अवध के नवाब की हार के बाद अंग्रेजो ने मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय के साथ इलाहाबाद की प्रथम संधि की जिसका विवरण निम्न प्रकार है-

सन 12 अगस्त 1765
प्रतिनिधि क्लाइव व शाह आलम

संधि की शर्ते –

  • मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने 12 अगस्त के फरमान के जरिए बंगाल ,बिहार , और उड़ीसा की दीवानी कंपनी को प्रदान की
  • सम्राट को अवध के नवाब से कड़ा और इलाहाबाद के जिले लेकर दिए ।
  • कंपनी ने मुगल बादशाह को 26 लाख रुपए प्रतिवर्ष पेंशन के रूप में देना तय किया ।
  • इस संधि पर शाह आलम , क्लाइव व बंगाल के नवाब ने हस्ताक्षर किए ।

मराठों द्वारा की गई प्रमुख संधियां-
शिवाजी की मृत्यु के पश्चात मुगल सत्ता को सर्वाधिक चुनौती मराठों से मिली ।
मराठों द्वारा की गई प्रमुख संधियों का संक्षिप्त विवरण निम्न प्रकार है –

संधि वर्ष संधिकर्ता
पुरंदर की संधि1665 जय सिंह व शिवाजी
सगोली की संधि1750 बालाजी बाजीराव व राजाराम
झलकी की संधि1752 बालाजी व हैदराबाद के निजाम के मध्य
राक्षस भुवन की संधि1763माधव राव सिंधिया व निजाम के मध्य
कंकापुर की संधि1769 माधव राव सिंधिया व जनकोजी
सूरत की संधि1775रघुनाथ राव व कंपनी के मध्य
पुरंदर की संधि1776माधव राव नारायण व अंग्रेज़
बड़ गांव की संधि1779माधव राव नारायण व अंग्रेज़
साल बाई की संधि1772माधव राव नारायण व अंग्रेज़
बसीन की संधि 1802बाजीराव द्वितीय व अंग्रेज़
देव गांव की संधि1803 भोंसले व अंग्रेज
सर्जी अर्जुन गांव की संधि1803सिंधिया व अंग्रेज़
राजापुर घाट की संधि1804होलकर व अंग्रेज
पूना की संधि1817बाजीराव द्वितीय व अंग्रेज़
गवलियार की संधि1817दौलत राव सिंधिया व अंग्रेज़
मन्दसौर की संधि1818होलकर व अंग्रेज

इन्हे भी पढ़ें

सर्जी अर्जुन गांव की संधि

भारतीय इतिहास में प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियां सक्रिय थी । क्षेत्रीय शक्तियों के मध्य समय-समय पर राज्य विस्तार को लेकर संघर्ष होते रहते थे भारत में यूरोपियों का आगमन के बाद अंग्रेजों ने भारतीय राजाओं को पराजित किया और कई समझौते किए इसी दौरान भारत की प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियों मराठा, मैसूर ,बंगाल ,अवध कर्नाटक के मध्य कई प्रमुख समझौते हुए जिन्होंने भारतीय इतिहास को एक नई दिशा प्रदान की प्रमुख समझौते निम्न प्रकार है –

प्रमुख ऐतिहासिक संधियां
अलीनगर की संधि 9 फरवरी 1757
इलाहाबाद की संधि1765 ई
मसूलीपट्टनम की संधि23 फरवरी 1768
बनारस की प्रथम संधि-1773 ई
बनारस की दूसरी संधि-1775 ई
सूरत की संधि-1775 ई
पुरंदर की संधि –1776 ई
बड़गांव की संधि-1779 ई
सालबाई की संधि – 1782 ई
बसई की संधि – 1802 ई
देवगांव की संधि1803 ई
सुरजी अर्जुन गांव की संधि1803 ई
अमृतसर की संधि1809
पुणे की संधि1817 ई
उदयपुर की संधि 1818 ई
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प्रथम कर्नाटक युद्ध (1746 से 1748 ई)
दूसरा कर्नाटक युद्ध(1749 से 1754 ई)
तीसरा कर्नाटक युद्ध(1756से 1763)
आंग्ल मराठा संघर्ष
प्रथम आंग्ल मराठा संघर्ष1775 से 1782 ई
दूसरा आंग्ल मराठा संघर्ष1803 से 1805
तीसरा आंग्ल मराठा संघर्ष1817 से 1819 ई
आंग्ल सिख संघर्ष –
प्रथम आंग्ल सिख संघर्ष 1845 -1846 ई
दूसरा आंग्ल सिख संघर्ष1848-49 ई
अन्य प्रमुख युद्ध –
पाल खेड़ा का युद्ध 1728 ई
प्लासी का युद्ध1757 ई
बक्सर का युद्ध 1764 ई
खेड़ा का युद्ध1707 ई
करनाल का युद्ध 1739 ई